प्रदेश में बीईओ के 3 सौ से अधिक पद खाली, विद्यालयों के कामकाज पर पड़ रहा असर
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) की भारी कमी के कारण बेसिक शिक्षा विभाग के कामकाज पर असर पड़ रहा है। प्रदेश में स्वीकृत पदों की तुलना में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिससे कई विकास खंडों में प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वर्तमान में प्रदेश में 1031 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 858 खंड शिक्षा अधिकारी ही कार्यरत हैं। पहले से ही 173 पद रिक्त थे। हाल ही में 164 खंड शिक्षा अधिकारियों को पदोन्नति मिलने के बाद उनकी नई तैनाती की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके चलते प्रदेश में कुल 337 बीईओ पदों की कमी हो जाएगी।
822 विकास खंडों में बीईओ की तैनाती जरूरी
प्रदेश के 75 जिलों में लगभग 822 विकास खंड हैं। प्रत्येक विकास खंड में एक खंड शिक्षा अधिकारी की तैनाती अनिवार्य मानी जाती है। लेकिन बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के कारण कई विकास खंडों का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारियों को संभालना पड़ रहा है।
नई भर्ती में नियमावली संशोधन बना बाधा
बेसिक शिक्षा निदेशालय ने बीईओ भर्ती से संबंधित 1992 की नियमावली में आंशिक संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा है। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारियों की सेवा शर्तों, नियुक्ति प्राधिकारी और अन्य प्रशासनिक बिंदुओं पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
इन प्रस्तावों पर शासन स्तर से मंजूरी न मिलने के कारण नई भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। यही वजह है कि रिक्त पदों को भरने का मामला फिलहाल अधर में लटका हुआ है।
शासन की मंजूरी का इंतजार
निदेशालय पदोन्नत अधिकारियों की तैनाती और संशोधित नियमावली को मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नियमावली में संशोधन और नई भर्ती होने के बाद ही बीईओ पदों की कमी को दूर किया जा सकेगा।
बीईओ पदों पर लंबे समय से बनी रिक्तियों के कारण विद्यालयों के निरीक्षण, शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे जल्द समाधान की मांग उठ रही है।







