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जानिए !कैसे टीचर से बनी आईएएस 🟢 विस्तार से आईएएस मोनिका रानी की कर्मकुंडली: कौन हैं मोनिका रानी? अब बनी स्कूल शिक्षा महानिदेशक

On: September 18, 2025 7:12 AM
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मोनिका रानी का जन्म एक मार्च 1982 में हरियाणा के गुरुग्राम में हुआ.बचपन से ही उनका सपना था IAS बनना. उनके भाई की मेहनत और पढ़ाई की लगन ने उन्हें बहुत प्रेरित किया. 2005 में उनकी शादी हो गई और जल्द ही वे मां बन गईं, लेकिन मां बनने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा.




Monika Rani Biography UPSC Batch 2010: बीकॉम और एमए के बाद बनीं टीचर मोनिका ने बीकॉम और इकोनॉमिक्स में एमए किया.पढ़ाई के दौरान ही वे दिल्ली के बिजवासन में एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका बन गईं.स्कूल में बच्चों को पढ़ाने,घर संभालने और बच्चे की परवरिश के बीच उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की. यह आसान नहीं था लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई. 2010 में चौथे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा में 70वीं रैंक हासिल की और 30 अगस्‍त 2010 को वह यूपी कैडर की IAS बन गईं. इसके बाद दो पार्ट में उन्‍होंने 10 जुलाई 2012 तक उन्होंने मैसूर में अपनी IAS की ट्रेनिंग पूरी की.



उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की डीएम मोनिका रानी इस समय चर्चा में हैं। आईएएस मोनिका रानी को यूपी सरकार ने बहराइच के जिलाधिकारी पद से तबादला कर दिया है। उन्हें अब महानिदेशक, स्कूल शिक्षा बनाया गया है। मोनिका रानी प्रधानमंत्री पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। सिविल सर्विस डे (21 अप्रैल) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएम मोनिका रानी को सम्मानित किया था। उन्हें विकासपरक और जनकल्याणकारी योजनाओं में छूट लोगों को लाभ दिए जाने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया। केंद्र सरकार ने दिए मोनिका रानी के पहल को सराहा। देश भर के 10 जिलों में उनका चयन किया गया। पीएम पुरस्कार 2023 के लिए मोनिका रानी बेहतरीन प्रदर्शन कर जगह बनाने में सफल रहीं। अब मोनिका रानी को यूपी सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दे दी है।



गुरुग्राम की रहने वाली हैं मोनिका

आईएएस मोनिका रानी को प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चुना गया था। सिविल सर्विस डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहराइच की डीएम मोनिका रानी को सम्मानित किया। उन्हें विकासपरक और जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित लोगों को लाभ दिए जाने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया। केंद्र सरकार ने दिए मोनिका रानी की पहल को सराहा। यूपी सरकार के भी पसंदीदा अधिकारियों में उनका नाम शामिल रहा है।





देश भर के 10 जिलों का पीएम पुरस्कार के लिए चयन किया गया था। पीएम पुरस्कार 2023 के लिए आई लिस्ट में मोनिका रानी ने बेहतरीन प्रशासनिक कार्यों के जरिए जगह बनाने में कामयाबी हासिल की। मोनिका रानी अपने कार्यों को लेकर खूब चर्चा में रही थीं। अब उनकी चर्चा ताजा आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर सूची में नाम आने के कारण हो रही है।





प्रेरक है आईएएस बनने की कहानी

मोनिका रानी मूल रूप से गुरुग्राम की रहने वाली है वर्ष 1982 में मोनिका रानी का जन्म हुआ था। स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद 23 साल की उम्र में वर्ष 2005 में उनकी शादी हो गई। उन्होंने पहले बीकॉम की पढ़ाई की। इसके बाद अर्थशास्त्र से मास्टर डिग्री हासिल की। एमए पास करने के बाद वह दिल्ली के सरकारी स्कूल में शिक्षक बन गईं। उनके पति कोलकाता में पोस्टेड थे।



मोनिका रानी को बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना था। शादी और बच्चे के बाद भी उनका यह सपना नहीं टूटा। वह अपने भाई से बेहद प्रभावित थी। मोनिका रानी ने मां बनने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की। उस समय उनका बेटा 8 महीने का था। वह सुबह जल्दी उठती थी। घर के काम निपटाकर कुछ देर पढ़ाई करती थी। इसके बाद स्कूल में शिक्षक का काम करने जाती थी।



स्कूल से वापस आने के बाद बच्चे की देखभाल और घर के काम करती थी। रात के समय में उन्हें कुछ वक्त मिलता था। उसमें वह पढ़ाई किया करती थी। यूपीएएसी परीक्षा 2010 में मोनिका रानी ने अपने सपने को पूरा कर दिखाया। इस परीक्षा में उन्होंने 70वीं रैंक हासिल की। 2011 बैच की इस आईएएस अफसर को यूपी कैडर मिला। यूपी में काम शुरू करने के बाद उन्होंने अपने कार्यों से सबको प्रभावित किया है।



हिंसा के दौरान दिखा सख्त तेवर

बहराइच में डीएम मोनिका रानी अपने सख्त तेवर के लिए भी पहचानी गईं। उन्होंने सोलर एनर्जी और जल जीवन मिशन में बेहतरीन काम किया। लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभ पहुंचाया। वहीं, बहराइच हिंसा के दौरान वह एसपी वृंदा शुक्ला के साथ उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए रोड पर उतरी थी।



साथ ही, बहराइच में जब भेड़ियों का आतंक गहराया तो डीएम मोनिका रानी ने ऑपरेशन भेड़िया चलाकर उन्हें पकड़ने का अभियान संचालित किया। उनके नेतृत्व में भूमाफिया और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कई बड़े एक्शन हुए हैं। इसकी भी जिले में खूब चर्चा होती है।



बहराइच से गहरा जुड़ाव

डीएम मोनिका रानी का बहराइच से गहरा जुड़ाव दिखता रहा है। प्रधानमंत्री पुरस्कार चयन पर उन्होंने इस पुरस्कार को बहराइच की जनता को समर्पित किया था। वहीं, बहराइच के लोगों ने भी इस पुरस्कार के लिए डीएम के चयन पर खुशी जाहिर की थी। लोगों का कहना है कि मोनिका रानी ने सेवा से संतृप्तिकरण अभियान के जरिए विकास की मिसाइल काम की।



लोगों का कहना था कि डीएम के नेतृत्व में जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ दूर-दराज के योग्य लोगों तक पहुंचाया गया। उनका समर्पण और नेतृत्व प्रेरणादायक है। उन्होंने कड़ी मेहनत और समर्पण से प्रशासनिक सेवाओं में उच्च स्थान हासिल किया। साथ ही, समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए।

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