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पंद्रह फीसदी परिषदीय स्कूलों का नहीं हुआ काल्याकल्प

On: March 4, 2026 7:16 AM
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पंद्रह फीसदी परिषदीय स्कूलों का नहीं हुआ काल्याकल्प

पंद्रह फीसदी परिषदीय स्कूलों का नहीं हुआ काल्याकल्प

आजमगढ़,  । जिले के पंद्रह फीसदी परिषदीय विद्यालयों का अभी भी कायाकल्प नहीं हो सका है। इन विद्यालयों को 19 पैरामीटर पर संतृप्त किया जाना है। अधिकांश जगहों पर अभी तक मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट भी नहीं बन सकी है। जिन स्कूलों में बनाई गई थी, वहां देखरेख के अभाव में खराब हो गई है। विद्यालयों में चहारदीवारी, बिजली कनेक्शन आदि का काम बाकी है। जिले में करीब 2706 परिषदीय स्कूल हैं। इनमे पौने तीन लाख से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। निजी विद्यालयों की तर्ज पर इन स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन की तरफ से वर्ष 2019 में मिशन कायाकल्प योजना शुरू की गई।

जिनमें विद्यालयों को 19 पैरामीटर पर संतृप्त किया जाना है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग से जबकि नगरीय क्षेत्र में नगर पंचायत की तरफ से काम कराया जा रहा है। जिले में अभी करीब अस्सी फीसदी काम पूरा हो सका है। पंद्रह फीसदी काम अधूरा है। विभाग के अनुसार, जिले में 150 से अधिक विद्यालयों की चहारदीवारी तक नहीं बनी है। 15 सौ से अधिक प्राइमरी स्कूलों में बच्चे फर्नीचर के अभाव में टाट-पट्टी पर बैठ कर पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों में अधिकांश जगहों पर दिव्यांग शौचालय नहीं बन पाए हैं। जहां बने हैं वहां साफ-सफाई के अभाव में निष्प्रयोज्य बने हैं। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इन सुविधाओं की होनी है व्यवस्था शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक शौचालय, बालिका शौचालय, जलापूर्ति, टाइल्स, दिव्यांग शौचालय, मल्टीपल हैड वाशिंग यूनिट, रसोईघर, विद्यालय की रंगाई-पुताई, रैप एवं रेलिंग, कक्षाओं में वायरिंग एवं विद्युत उपकरण सबमर्सिबल द्वारा नल जल आपूर्ति, फर्नीचर, चहारदीवारी की व्यवस्था होनी है। 85 स्कूलों में नहीं है बिजली कनेक्शन जिले के 85 परिषदीय स्कूलों में शासन से धनराशि अवमुक्त होने के बाद भी बिजली विभाग की तरफ से कनेक्शन नहीं दिया गया है। इन स्कूलों में लगे पंखे शोपीस बने हैं। इससे गर्मी में शिक्षक और बच्चे काफी परेशान रहते हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कुछ विद्यालयों में तकनीकी कारणों से बिजली कनेक्शन नहीं हो पा रहे हैं। व्यवस्था कराई जा रही है।

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