शिक्षामित्रों ने चिकित्सा अवकाश की मांग उठाई, मुख्यमंत्री से नियम लागू करने की अपील
लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने राज्य सरकार से शिक्षामित्रों के लिए चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) का प्रावधान लागू करने की मांग की है। संघ ने हाल ही में शिक्षामित्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों एवं आकस्मिक चिकित्सा स्थितियों में ₹5 लाख तक की कैशलेस उपचार सुविधा के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इसके साथ चिकित्सा अवकाश की व्यवस्था भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री से की विशेष मांग
संघ के प्रदेश संगठन मंत्री कोशल कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि जिस प्रकार अन्य शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को चिकित्सा अवकाश का लाभ मिलता है, उसी प्रकार शिक्षामित्रों को भी यह सुविधा प्रदान की जाए।
बीमारी के दौरान मानदेय कटने की समस्या
संघ का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में यदि कोई शिक्षामित्र गंभीर बीमारी, दुर्घटना या अन्य चिकित्सकीय कारणों से विद्यालय से अनुपस्थित रहता है, तो उसके मानदेय में कटौती हो जाती है। इससे शिक्षामित्रों को बीमारी के समय आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कैशलेस योजना के साथ मेडिकल लीव भी जरूरी
शिक्षामित्र संघ का मानना है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा एक सराहनीय कदम है, लेकिन योजना को प्रभावी और पूर्ण बनाने के लिए चिकित्सा अवकाश का प्रावधान भी किया जाना चाहिए। इससे शिक्षामित्र बिना आर्थिक नुकसान की चिंता किए अपना इलाज करा सकेंगे।
संघ की प्रमुख मांगें
- शिक्षामित्रों के लिए चिकित्सा अवकाश की व्यवस्था लागू की जाए।
- बीमारी या दुर्घटना के दौरान मानदेय में कटौती न हो।
- कैशलेस चिकित्सा योजना के साथ मेडिकल लीव का लाभ भी दिया जाए।
नोट: यह मांग शिक्षामित्र संघ की ओर से सरकार के समक्ष रखी गई है। चिकित्सा अवकाश संबंधी कोई भी अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही लागू होगा।







